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Sunday, December 13, 2020

13 दिसम्बर 2020

आज का रविवारीय सामूहिक भ्रमण बेलव्यू के रॉबिंसवुड पार्क के आसपास हुआ। वहाँ से हम दो मील दूर माइक्रोसॉफ्ट और बोइंग के दफ़्तर तक पहुँचे। वहाँ से एक चर्च के सामने होते हुए वापस आए।  


यह चर्च बहुत ही भब्य है, शानदार है। इसके सामने फ़व्वारा है, अमरीका का लहराता झंडा है। सारे चर्च इतने भव्य नहीं होते हैं। यह एक अपवाद है। इस चर्च के सामने लिखा भी है सिएटल टेम्पल। बहुत ही अनोखी बात लगी। टेम्पल का मतलब मंदिर समझा जाता है। या जहाँ पूजा की जाती हो। इस अर्थ में चर्च भी मंदिर ही है, इसमें दो राय नहीं। लेकिन फिर भी किसी मंदिर के सामने चर्च लिखा नहीं दिखेगा। हाँ अमृतसर के गुरुद्वारे को मंदिर ज़रूर कहते हैं। 


आज मैं एपल घड़ी द्वारा रास्ता नापना भूल गया था। एक घंटे बाद याद आया तो लगाया। 


अमेरिका में प्रायः हर दूसरे-तीसरे परिवार के घर में एक पालतू कुत्ता रहता है। उन्हें बाहर घूमाना ज़रूरी होता है। सारे कुत्तों को बाक़ायदा समझाया जाता है कि सभ्य समाज में कैसे रहा जाता है। अनावश्यक भोंकते नहीं हैं। किसी को परेशान नहीं करते। फिर भी मालिकों को सख़्त हिदायत है कि बाहर ले जाते वक़्त वे लीश पर रहे ताकि ग़लती से किसी अनजान व्यक्ति को काट न लें। 


पार्क में जाली से सुरक्षित एक क्षेत्र ऐसा बना दिया जाता है जहाँ वे कुत्तों को खुला छोड़ सकते हैं। राबिंसवुड पार्क में भी ऐसा क्षेत्र है। एक फ़ोटो में आप देख सकते हैं कि यदि दौड़भाग में कुत्ते को प्यास लग जाए तो उसके लिए एक विशेष नल का इंतज़ाम है जिससे कुत्ता आराम से पानी पी सके। 


यहाँ कुछ लोगों के पास अपने घोड़े भी हैं। उनके पास लम्बी-चौड़ी ज़मीन है जहाँ अस्तबल होते हैं। वे जब घोड़े लेकर घूमने निकलते हैं तो कई बार कोई सड़क भी पार करनी पड़ती है। ट्रेफ़िक को रोकने के लिए एक बटन दबाना पड़ता है, ताकि ट्रैफ़िक को लाल लाईट दी जा सके। ऐसे स्थानों पर बटन बहुत ऊँचा होता है ताकि घुड़सवार को उतर कर बटन न दबाना पड़े। 


यहाँ समाज के हर तबके का ख़याल रखा जाता है। यहाँ तक कि किसी गली में यदि कोई बहरा इंसान रहता है तो बड़ा सा ट्रैफ़िक साईन होगा कि यहाँ कोई बहरा है तो आप ध्यान से गाड़ी चलाए। 


नेत्रहीन भी सिनेमाघर में जाकर फ़िल्म का आनंद उठा सके, उसका भी इंतज़ाम है। जैसे हमें तेलुगु समझ न आए तो हम सबटाइटल से समझ जाते हैं। वैसे ही नेत्रहीन देख नहीं सकते हैं तो क्या हुआ, सुन तो सकते हैं। उन्हें एक विशेष हेडफ़ोन दिया जाता है जिसमें फ़िल्म के हर सीन का आँखों देखा हाल सुनाया जाता रहता है। जैसे एक ज़माने में हम क्रिकेट की कमेंट्री से कपिल देव के चौके-छक्के 'देखा' करते थे, वैसे ही ये फ़िल्म 'देखते' हैं। 


राहुल उपाध्याय । 13 दिसम्बर 2020 । सिएटल 


Monday, December 7, 2020

6 दिसम्बर 2020

 


कल का सामूहिक रविवारीय प्रातः भ्रमण मेडायना में हुआ। यहाँ माइक्रोसॉफ़्ट के संस्थापक बिल गेट्स और अमेज़ॉन के संस्थापप जेफ़ बेज़ोस के घर हैं। जहाँ से हमने चलना शुरू किया वहाँ नगर पालिका है, पोस्ट ऑफ़िस है, पुलिस स्टेशन है और एक छोटी सी दुकान है। वहाँ से मात्र दस घर दूर बिल गेट्स का आलीशान मकान है।  इसके चर्चे इंटरनेट पर एक ज़माने में बहुत रहे।  आज भी इनकी जानकारी वहाँ से मिल सकती है। इस घर की क़ीमत 700 करोड़ रूपये से अधिक है, जिसका सालाना टैक्स 7 करोड़ रूपया है। 


मुझे अमेरिका के जीवन की यह बात बहुत अच्छी लगती है कि जो सुविधाएँ अमीरों को उपलब्ध है, वे एक आम आदमी को भी हैं।  जिस झील का, जिस पानी का, जिस पर्वत का, जिस दृश्य का आनंद बिल गेट्स अपने घर की खिड़कियों से उठाते हैं, वही आनंद मैं भी मेडायना बीच पार्क से उठा सकता हूँ। मैं इसलिए यहाँ कई-कई बार आता हूँ। 


यह शहर मेरे शहर से क़रीब दस मील दूर ही है और जुड़ा हुआ है। माइक्रोसॉफ्ट का दफ़्तर भी यहाँ से क़रीब तीन-चार मील के अंदर ही है। मैं पहले भी कह चुका हूँ लेकिन एक बार फिर बता देता हूँ कि यहाँ सम्पन्न से सम्पन्न व्यक्ति भी अपनी कार ख़ुद ही चलाता है।  वो शायद इसलिए कि उन्हें कार चलाने का शौक़ है और कार जो वो लेते हैं वो कोई आम कार नहीं होती है। उन्हें चलाने का आनंद ही अलग होता है। बहरहाल बिल गेट्स के बारे में तो मशहूर है कि वे कारों के शौक़ीन हैं और तेज कार चलाने की उनकी आदत है। बिल गेट्स तो पैदा ही सिएटल में हुए थे लेकिन यह घर माइक्रोसॉफ्ट की कमाई से ही बनवाया था।  जेफ़ बेज़ोस बहुत बाद में पूर्वी अमेरिका से आए और उन्होंने भी अमेजॉन की कमाई से ही यहाँ यह घर बनवाया। 


सिएटल बहुत ही सुंदर शहर है। रोज़गार, मौसम और शिक्षा के मामले में अन्य शहरों से कहीं आगे। और महँगाई बाक़ी महानगरों की अपेक्षा कम है। इसलिए मुझे सर्वाधिक पसंद है। जेफ़ बेज़ोस और बिल गेट्स के भी अपने कारण होंगे। 


कल बादल थे सो माउंट रेनियर नहीं दिखा। जून 2017 का फ़ोटो दे रहा हूँ।


क्रिसमस की सजावट भी अब शुरू हो गई है। सो एक पार्क में क्रिसमस की रोशनी की तस्वीर है। चर्च के अंदर की रोशनी भी बाहर से प्यारी लग रही है। 


राहुल उपाध्याय । 7 दिसम्बर 2020 । सिएटल 

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Best Regards,
Rahul
425-445-0827

Monday, November 30, 2020

29 नवम्बर 2020

कल का रविवारीय सामूहिक प्रात: भ्रमण समामिश पुस्तकालय के इर्द-गिर्द हुआ। इसका निर्माण मेरे इस शहर में आने के बाद हुआ। यहीं नगरपालिका भी है। पुलिस थाना भी। स्केटबोर्ड पार्क भी। यहीं पर वो मतदान पेटी है जिसमें मैंने अपना वोट डाला था। 


समामिश शहर भी ज़्यादा पुराना नहीं है। इस शहर को कई बार सबसे अच्छा शहर घोषित किया जा चुका है। 


सबसे अच्छा? अब ये बहुत बड़ा गोरखधंधा है। सबसे अच्छा किस हिसाब से? देखने लगो तो हर शहर किसी न किसी बात में सबसे अच्छा है। आजकल शहरों की कई श्रेणियाँ बना दी गईं हैं। वे शहर जो महानगर नहीं है। वे शहर जो पचास साल से पुराने नहीं हैं। वे शहर जिनमें कोई कारख़ाना नहीं है। वे शहर जहाँ विश्वविद्यालय नहीं है। वे शहर जहाँ जलाशय नहीं है। वे शहर जहाँ सिर्फ एक ही धर्म के लोग नहीं है। वे शहर जहाँ कम से कम दस उद्यान हो। वग़ैरह। वग़ैरह। 


बावजूद इसके कि मैं ऐसे पुरस्कारों को महत्व नहीं देता हूँ, मुझे यह शहर पसन्द है। रेडमण्ड, जहाँ माइक्रोसॉफ़्ट का मुख्यालय है, वह समामिश का पड़ोसी है। और कर्कलेण्ड भी पड़ोसी शहर है जहाँ कास्टको का मुख्यालय है। 


पुस्तकालय एक ऊँची पहाड़ी पर है जहाँ से सिएटल का विहंगम दृश्य दिखता है सिएटल का, जहाँ अमेज़ॉन का मुख्यालय है। कल बादल हमसे लिपट रहे थे सो सिएटल नहीं देख पाए। लेकिन सूरज इतना मनमोहक था कि पूर्णिमा का चाँद भी शरमा जाए। 


यहाँ से जो सड़क निकलती है वह इतने तीव्र उतार पर है कि सर्दी के दिनों में ओस जम जाए तो गाड़ियाँ बेक़ाबू हो जातीं हैं। बर्फ़ गिर जाए तो यातायात ठप्प हो जाता है। बच्चे तब ट्यूब पर बैठकर फिसलने का लुत्फ़ उठाते हैं। 


कल सुबह-सुबह सड़क ख़ाली थी सो बीचोंबीच खड़े हो कर तस्वीर खींचवा ली। 


राहुल उपाध्याय । 30 नवम्बर 2020 । सिएटल


Sunday, November 22, 2020

22 नवम्बर 2020

आज का साप्ताहिक सामूहिक प्रात: भ्रमण वहीं से आरम्भ हुआ जहाँ से पिछले सप्ताह हुआ था। लेकिन इस बार हम दक्षिण दिशा की ओर चले। क़रीब दो मील दूर पर जीन कुलॉन बीच पार्क मिला। अति रमणीक स्थल है। पतझड़ के रंगों ने इसे और मनोरम बना दिया। तड़के सुबह धुँध का अपना रोमांच था। फिर धूप निकली तो छटा ही निराली हो गई। 


यह पार्क वाशिंगटन झील के पूर्वी छोर पर है। यहाँ से दूसरी ओर स्थित मर्सर द्वीप दिखाई देता है। दक्षिण में बोईंग का कारख़ाना है जहाँ हवाई जहाज़ बनते हैं। एक फ़ोटो में ग़ौर करें तो हवाई जहाज़ दिख जाएगा। झील के किनारे कारख़ाने की कल्पना ही अजीब लगती है। लेकिन यह सच है। यहीं पर रेंटन नगरपालिका विमानतल है। इस विमानतल की यह ख़ासियत है कि यहाँ जितनी उड़ानें जातीं हैं, उतनी आतीं नहीं हैं। क्योंकि बोईंग निर्मित हवाई जहाज़ परीक्षा में पारंगत हो जाने के बाद जब उड़ते हैं तो फिर वापस नहीं आते। 


हमारी तरह। 


छठ पूजा के उपलक्ष्य में एक सज्जन ठेकुआ ले कर आए। 57 वर्ष की उम्र में पहली बार इसका नाम सुना, और इसे खाया। जो इससे अपरिचित हो, उन्हें यह सन्दर्भ दे दूँ कि मालवा में चूरमा के लड्डू के लिए जो बाटी बनती है, वह स्वाद में और दिखने में ठेकुआ से मिलती-जुलती है। एक फ़ोटो में ठेकुआ का विवरण है। 


राहुल उपाध्याय । 22 नवम्बर 2020 । सिएटल 

Sunday, November 8, 2020

8 नवम्बर 2020

आज शून्य डिग्री सेल्सियस तापमान में 4.87 मील, क़रीब 8 किलोमीटर का रविवारीय साप्ताहिक सामूहिक भ्रमण हुआ। 900 फ़ीट से ज़्यादा की चढ़ाई चढ़ी। 


किन्हीं कारणवश आज हम सिर्फ़ तीन ही थे।


लेकमॉन्ट इलाक़े में हम पहले जा चुके हैं। लेकिन यह क्षेत्र इतना विशाल है कि कोई भी नया कोना पकड़ लो, एक नई राह मिल जाती है। हर तरफ़ सुन्दर नज़ारे। बस देखने भर की देर है। 


सिएटल में वर्ष में एक-दो बार ही बर्फ गिरती है। जब गिरती है तो इन पहाड़ियों पर ज़्यादा गिरती है और जमी भी कई दिनों तक रहती है। पहाड़ी पर स्थित होने की वजह से कारों का आवागमन भी मुश्किल हो जाता है। 


आज भी ठंड ज़्यादा थी सो कहीं-कहीं ओस की परत जम गई थी। 


घर लौटते वक़्त कार में रेडियो पर सुना कि एलेक्स ट्रेबेक नहीं रहें। बहुत दुख हुआ। 


वे 80 वर्ष के थे। पिछले एक साल से कैंसर से जूझ रहे थे। वही कैंसर जिसने स्टीव जॉब्स की जान ले ली थी। 


एलेक्स ज्यपोर्डी कार्यक्रम के मेज़बान थे। शुरू से अंत तक। यह 22 मिनट का एक ऐसा अनूठा प्रतियोगिता कार्यक्रम है जिसमें उत्तर दिए जाते हैं, और प्रतिभागियों को सही प्रश्न बताने पर इनाम मिलता है। जैसे कि:

उत्तर: इन्हें भारत का राष्ट्रपिता भी कहा जाता है और इनके जीवन पर बनी फ़िल्म को ऑस्कर पुरस्कार भी मिल चुका है। 

यदि प्रतिभागी कहे: महात्मा गाँधी 

तो वह ग़लत होगा। 


सही होगा: महात्मा गांधी कौन है? 


बड़ा ही रोचक कार्यक्रम है। मैं जब से अमेरिका में हूँ (1986) तब से उनका कार्यक्रम देखता आया हूँ। वे अभी कोरोना काल में भी यह कार्यक्रम रिकार्ड कर रहे थे। जून-जुलाई में रिकार्ड हुए प्रोग्राम इन दिनों दिखाए जा रहे हैं। अंतिम कार्यक्रम क्रिसमस के दिन दिखाया जाएगा। 


राहुल उपाध्याय । 8 नवम्बर 2020 । सिएटल 






Sunday, November 1, 2020

1 नवम्बर 2020


आज का रविवारीय सामूहिक प्रात: भ्रमण सोमरसेट में स्थित फ़ॉरेस्ट रिज स्कूल के इर्द गिर्द हुआ। इस निजी स्कूल में बिल गेट्स की बेटी पढ़ी है। अमेरिका में सरकारी स्कूलों में बारहवीं तक की पढ़ाई मुफ़्त है। यदि आप निजी स्कूल जाते हैं तो ख़र्चे बहुत हैं। आम तौर पर सरकारी स्कूलों में पढ़ाई बहुत अच्छी होती है। सो निजी स्कूलों में जाने का कोई औचित्य नहीं है लेकिन फिर भी कुछ निजी स्कूल हैं और कुछ अभिभावक अपने बच्चे वहाँ भेज देते हैं।  बिल गेट्स स्वयं एक निजी स्कूल में पढ़े हैं।  वहीं साठ के दशक में उन्हें कंप्यूटर का उपयोग करने की सुविधा मिल गई थी। उन्हें उसमें रुचि आने लगी थी। बाक़ी की कहानी तो सब जानते ही हैं कि कैसे कम उम्र में उन्होंने कंप्यूटर प्रोग्रामिंग की नौकरी की। एक कंपनी भी खोली जो ज़्यादा नहीं चली। बाद में माइक्रोसॉफ्ट खोली। जिसमें मैं अभी काम कर रहा हूँ। 


पूरे देश में समान स्थिति नहीं है। जब मैं सेन फ़्रांसिस्को में था, वहाँ सरकारी स्कूलों में अच्छी पढ़ाई न होने के कारण विवश हो प्रेरक को निजी स्कूल में भेजना पड़ा। इतनी फ़ीस कि मैं हैरान हो गया। कॉलेज की फ़ीस कम होती है, पहली कक्षा की ज़्यादा। और दाख़िला भी निश्चित नहीं। प्रेरक के दाख़िले के लिए मैं और मेरे मित्र फोल्डिंग कुर्सी पर रात भर क़तार में बैठे रहे तब जाकर सुबह दाख़िले में नम्बर आया। 


फ़ारेस्ट रिज की सालाना फ़ीस 33 हज़ार डॉलर है। मेरे छोटे बेटे की वाशिंगटन विश्वविद्यालय की सालाना फ़ीस 17 हज़ार डॉलर है। 


फ़ॉरेस्ट रिज कैथोलिक स्कूल है और सिर्फ़ लड़कियों का। बिल की पत्नी मिलिंडा भी डलास में ऐसे ही किसी लड़कियों के कैथोलिक स्कूल में पढ़ीं हैं। 


सोमरसेट इलाक़ा मेरे ही शहर में है और मेरी ही सड़क पर पाँच मील दूर है। यह बहुत ही संभ्रान्त इलाक़ा है और 900 फ़ीट ऊँची पहाड़ी पर स्थित है। यहाँ से पूरे सिएटल का नज़ारा दिखता है। यहाँ से ओलंपिक और केस्केड पर्वतों की श्रृंखलाएं दिखती है। सिएटल शहर एक वादी में बसा हुआ है कई झीलों के साथ। मार्च में कोविड के कारण भ्रमण रूक गया था अब जब शुरू हुआ तो लोग आने लगे।  आज पाँच साथी ओर जुड़ गए। बड़े दिनों बाद सबको मिलकर बहुत अच्छा लगा। हमेशा की तरह बहुत फ़ोटो खींचे। चाय पी और कुछ मीठा-नमकीन मी खाया गया। सिएटल शहर की प्रख्यात मीनार -  स्पेस मिडल -  605 फ़ीट ऊँची है। हमने आज के भ्रमण में सात सौ फ़ीट की चढ़ाई चढ़ ली। 


राहुल उपाध्याय । 1 नवम्बर 2020 । सिएटल 



Sunday, October 25, 2020

सामूहिक साप्ताहिक प्रात: भ्रमण का इतिहास:

सामूहिक साप्ताहिक प्रात: भ्रमण का इतिहास:


माइक्रोसॉफ़्ट में एक सज्जन वैनकूवर (कनाडा) से तबादला लेकर आए। क़िस्मत से उन्होंने मेरे मोहल्ले में ही घर लिया। मिलना-जुलना होता रहा। एक दिन उनके घर वैनकूवर के मित्रगण आए। वे बातें करने लगे कि वैनकूवर में शनिवार का प्रात: भ्रमण की कमी खल रही है। यहाँ तो कुछ ऐसा नहीं है। वैनकूवर कितना सुंदर है। आदि-आदि। 


मैंने कहा कि सिएटल भी वैनकूवर जैसा ही सुन्दर है। हम दोनों शुरू कर सकते हैं वैसा ही भ्रमण जैसा वैनकूवर में होता था। 


हमने रविवार चुना। शनिवार को बच्चों की गतिविधियों (फुटबॉल, समाजसेवा इत्यादि) में बाधा आ सकती थी। शुक्रवार की शाम प्राय: कोई न कोई फ़िल्म भी सपरिवार देखी जाती थी। सोने में देर होती थी, सो सुबह जल्दी उठ पाना आसान नहीं लगता था। रविवार की सुबह अमेरिका में सार्वजनिक गतिविधियाँ कम होतीं हैं। यह समय चर्च जाने के लिए सुरक्षित माना जाता है। 


रवि की सुबह सात से नौ का समय निर्धारित किया गया ताकि वापस घर जल्दी आ जाया जा सके। और परिवार के किसी और काम का नुक़सान न हो। 


कौन आ सकता है, कौन नहीं, इस पर कोई प्रतिबंध नहीं। सिवाय इसके कि समय पर आए। इसी कारण यह प्रायः पुरूष प्रधान समूह रहा। बच्चे इतनी जल्दी रविवार को उठना नहीं चाहते। क्योंकि सोम से शुक्र वे उठते ही हैं स्कूल के लिए बहुत जल्दी। बच्चों की माताएँ भी इसी वजह से नहीं आ पातीं हैं। हालाँकि कई बार अपवाद स्वरूप बच्चे और माताएँ भी शामिल हुए हैं। जिनके बच्चे नहीं हुए हैं वे युगल भी शामिल हुए हैं। 


चाहे कितनी भी गर्मी हो, सर्दी हो, या बारिश हो। भ्रमण न रूकता है, न समय बदलता है। चूँकि मैं हर बार उपस्थित रहता हूँ सो मैंने खुद ज़िम्मेदारी ले ली स्थान तय करने की। हर गुरूवार को सोने से पहले मैं सबको सूचित कर देता हूँ कहाँ से भ्रमण शुरू होगा। 


कोरोना से पहले कारपूल का भी इंतज़ाम रहता था। एक ने ज़िम्मेदारी ले ली कि वे हमेशा अपनी गाड़ी से जाएँगे। उसमें सात प्राणी बैठ जाते थे। उन्होंने ही तय किया कि वे थर्मस फ़्लास्क में गरमागरम चाय भी लाएँगे। 


इतना जज़्बा बहुत कम देखने को मिलता है। सुबह छ: बजे पूरा फ्लास्क भरकर प्रेमपूर्वक बहुत ही मज़ेदार चाय बनाना, साढ़े छ: तक कारपूल से अन्य साथियों को लेना, ताकि सात बजे भ्रमण आरम्भ हो सके - जब तक दिल न हो, नहीं किया जा सकता। और वह भी हर रविवार, लगातार चार साल तक। 


जब वे किसी कारणवश नहीं आ पाते तो कोई और चाय की ज़िम्मेदारी ले लेता था। 


मैं चाय नहीं पीता। इसलिए मेरे लिए छोटे थर्मस में गर्म पानी होता था और हर्बल चाय का पैकेट। 


किसी ने सोचा चाय के साथ बिस्किट हो तो अच्छा होगा। और वे ले आए। सब ख़ुश। देखादेखी सब कभी कुछ, कभी कुछ लाने लगे। पोहा, कचोड़ी, समोसा, आलू का पराठा, नमकीन, केक, मिठाई सब कभी न कभी मिल जाते थे। और सब एक सुखद आश्चर्य की तरह। 


किसी ने फ़ोटो खींचने का काम ले लिया। 


जब भी किसी ने शहर छोड़ा तो उसे विदाई में एक कोलॉज दिया गया। सबके हस्ताक्षर के साथ। लोग जुड़ते गए, बिछुड़ते गए। 


राहुल उपाध्याय । 25 अक्टूबर 2020 । सिएटल 


25 अक्टूबर 2020

आज का सामूहिक साप्ताहिक प्रात: भ्रमण हमेशा की तरह बहुत आनन्ददायक रहा। 


वाशिंगटन विश्वविद्यालय से जुड़ी 230 एकड़ की वनस्पति-वाटिका एक ऐसा उद्यान है जहाँ दुनिया भर के कई क़िस्म के पेड़, पौधे, झाड़ियाँ बड़े एहतियात के साथ लगाईं गईं हैं। उनकी नियमित रूप से देख-रेख भी होती है। 


पतझड़ की मनोरम छटा हमें और हमारे कैमरे को आकर्षित करती रही। 


रसगुल्लों से आनन्द बढ़ गया। 


राहुल उपाध्याय । 25 अक्टूबर 2020 । सिएटल 


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Sunday, September 27, 2020

पेड़ से फल तोड़ना

ननिहाल में घर में जामुन का पेड़ था। दासाब (नाना) ही अक्सर जामुन तोड़ते थे और हम पन्द्रह सदस्य पाँति करके आनन्द से खाते थे। 


तब से पेड़ से तोड़ कर फल खाने का लोभ मैं छोड़ नहीं पाता हूँ।


आज भी यही हुआ। रविवारीय सामूहिक प्रात: भ्रमण के दौरान एक सेब का पेड़ नज़र आ गया। मैंने एक तोड़ा तो तीन और साथ आ गए। सहचर ने एपल से एपल की फ़ोटो ली तो मेरी हँसी छूट गई। 


सिएटल बहुत हरा-भरा है। चारों ओर हरियाली, पेड़ और झीलें। बरसात छिटपुट-छिटपुट तक़रीबन रोज़ ही होती रहती है। इसलिए यह शहर बदनाम भी है। धूप भी रोज़ निकलती है। लेकिन उसका चर्चा नहीं होता। 


कहीं भी कोई फलदार पेड़ नहीं। है तो किसी के घर में या बाग में। यह जानबूझकर किया गया ताकि साफ़-सफ़ाई की ज़हमत न उठानी पड़े। 


यह पेड़ किसी के घर का था पर सड़क के क़रीब। कोई जाली या बाड़ भी नहीं थी। सो तोड़ लिया। वैसे भी वे गिर कर सड़ रहे थे। 


1998 में जब कैलिफ़ोर्निया राज्य में अपना पहला घर ख़रीदा था, तब सेब, संतरे के पेड़ और अंगूर की बेल लगाई थी। 2004 में सिएटल आया। यह वाशिंगटन राज्य में है। यहाँ के सेब बहुत प्रसिद्ध हैं। जैसे कि नागपुर के संतरे। या इलाहाबाद के अमरूद। 


यहाँ कोई फलदार पेड़ नहीं लगाए। चूँकि कैलिफ़ोर्निया में भुगत चुके थे कि जब फल आते हैं तो थोक में आते हैं। न खाते बने, न कोई लेने को तैयार। मन्दिर में दान दिए जा सकते हैं। लेकिन वहाँ भी घर की मुर्ग़ी दाल बराबर। जो रंग, रूप, आकार, चमक बाज़ार के सेब में है वो घर के खाद-रहित फलों में कहाँ। 


राहुल उपाध्याय । 27 सितम्बर 2020 । सिएटल