Saturday, May 2, 2026

एक दिन

साई पल्लवी और जुनैद खान अभिनीत नई फिल्म "एक दिन" बहुत ही अच्छी फिल्म है। सिर्फ दो घंटे की है, जो कि आजकल चार घंटे चलने वाली फिल्मों के बजाय काफी अच्छी है और पूरी फिल्म एक ही विषय पर केंद्रित है। इधर-उधर की बातों में भटकती नहीं है। हाँ, हालांकि एक अंग्रेजी फिल्म ‘वन डे’ पर आधारित है, लेकिन फिर भी बहुत अच्छी है। मैंने मूल फिल्म देखी नहीं है, पर जो भी हो, बहरहाल बहुत ही अच्छी फिल्म है। 


फिल्म का विषय यह सोचने पर बाध्य करता है कि हमें सब कुछ पूरे जीवन ही क्यों चाहिए? एक जीवन भी कई बार पूरा नहीं पड़ता है, पर एक जीवन की सीमा तो है ही। तो कभी अगर एक दिन की ही सीमा हो तो क्या बुरा है? क्यों हम चाहें कि हम पेरिस में पूरे जीवन रहें? क्यों नहीं एक दिन ही काफी है? 


इसी तरह किसी का साथ एक दिन, 50 दिन या पाँच साल ही रहे तो भी क्या बुरा है? क्यों पूरे जीवन साथ रहने की जिद है? 


फिल्म की पटकथा में कुछ खामियां जरूर हैं, लेकिन वो सब नजरअंदाज की जा सकती हैं। 


साई पल्लवी का अभिनय बहुत ही दमदार है। 


इस फिल्म की वजह से शायद लोग अब जापान ठंड के दिनों में जाने की कोशिश करेंगे, और यह एक नया स्विट्जरलैंड साबित हो सकता है। 


राहुल उपाध्याय । 2 मई 2026 । सिएटल