जिस कहानी में रतलाम हो, सुधा-चंदर हों, इंदौर हो, भोपाल हो, शिमला नहीं तो मसूरी ही हो, वो कहानी बुरी कैसे लग सकती है। अभी तक तो दो एपिसोड ही देखे हैं पता नहीं आगे जा कर कैसी रहेगी पर अभी तो बहुत अच्छी लग रही है। बिंज वॉच करके मैं सारे ही एपिसोड एक साथ देखना चाहता था लेकिन मन को रोका। पिछले महीने शिंगल्स हो गए थे तब से सोचता हूँ रात देर तक जागना सेहत के लिए ठीक नहीं है।
दिव्य प्रकाश दुबे के उपन्यास - मुसाफ़िर कैफे - पर यह धारावाहिक आधारित है। जो कि आधुनिक युग के बहुत चर्चित लेखक हैं।
मुख्य कलाकार विक्रांत मेसी हैं। सुधा की भूमिका में वेदिका पिंटो हैं। तीसरा किरदार महिमा मकवाना निभा रही हैं। तीनों ने जानदार अभिनय किया है।
संवाद भी अच्छे हैं। प्रवाह भी अच्छा है।
कभी-कभी लगता है कि साहित्य में सास-बहू का या एकता कपूर का या करण जौहर का तड़का लग गया है।
लेकिन रचनात्मकता के लिए थोड़ी ढील तो देनी ही चाहिए।
रूचिर अरूण निर्देशक हैं।
राहुल उपाध्याय । 26 जुलाई 2026 । सिएटल