Rahul's Blog

Friday, December 19, 2025

बाढ़ के बाद

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सिएटल यूँ तो बरसात के लिए बहुत बदनाम है पर पिछले दो हफ़्ते से बहुत ही ज़्यादा बारिश हो रही है। नदियाँ उफान पर थीं, भूस्खलन के कारण रास्ते बं...
Thursday, December 18, 2025

सरोगेसी

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समय कितना बदल रहा है। लोग जन्मतिथि से अपनी राशि तय करते हैं। समय और स्थान देखकर जन्मपत्री बनती हैं। रिश्ते तय होते हैं। कुछ इससे अपना भविष्य...
Tuesday, December 9, 2025

किताब

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कब, कैसे, कहाँ से ख़ुशी मिल सकती है, कहा नहीं जा सकता।  पिछले साल अजय ब्रह्मत्मज जी के अनुरोध पर सौ कविताओं का संकलन तैयार कर लिया। प्रमिला ...
Saturday, October 18, 2025

भागवत’ - चैप्टर 1 - राक्षस

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कहानी कितनी ही सच्ची क्यों न हो, उसे पर्दे पर दिखाते समय कुछ बेवक़ूफ़ियाँ हटा देनी चाहिए।  कौनसा फ़ोन नम्बर कब से बंद पड़ा है यह तो पुलिस वा...
Friday, July 18, 2025

ये मैंने कैसे जूते पहन रखे हैं

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जब से होश सँभाला है मम्मी को हमेशा मेहनत करते देखा। सबकी सेवा करते देखा। यातनाएँ सहते देखा। सबसे दबते देखा। किचन में फँसते देखा। दो मिनट की ...
Friday, May 9, 2025

सपने

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सपने सबके पूरे होते होंगे जैसे मेरे हो रहे हैं। कई बार सपने पूरे हो जाते हैं और हमें ध्यान ही नहीं रहता है कि ये सपने हमने कभी देखे थे। हम स...
1 comment:
Wednesday, February 26, 2025

बिजली गुल

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अमेरिका में आम तौर पर बिजली जाती नहीं है लेकिन सिएटल में ऊँचे सदाबहार पेड़ों की वजह से कई बार जब तेज़ हवा चलती है तो उनके गिरने से बिजली के ...
1 comment:
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Rahul Upadhyaya
राह चलते सबसे मिला
हुआ नहीं किसी से गिला
लगातार चले ये सिलसिला

उसी आस में जी रहा
पानी घाट-घाट का पी रहा
ध्वज मैं कोई लहराता नहीं
यारों से मैं कतराता नहीं
यही सच है कि मैं हूं एक सैलानी
upadhyaya@yahoo.com
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