Friday, December 19, 2025

बाढ़ के बाद

सिएटल यूँ तो बरसात के लिए बहुत बदनाम है पर पिछले दो हफ़्ते से बहुत ही ज़्यादा बारिश हो रही है। नदियाँ उफान पर थीं, भूस्खलन के कारण रास्ते बंद हो गए थे। कुछ घरों में पानी घुस गया था। 


यहाँ ज़िले को काउंटी कहा जाता है। उन्होंने कुछ उपाय जारी किए हैं बाढ़ के बाद किसी समस्या से कैसे निपटने के लिए। 


यह देखकर अच्छा लगा कि ये निर्देश अन्य भाषाओं के साथ-साथ हिंदी में भी हैं। 


https://cdn.kingcounty.gov/-/media/king-county/depts/dph/documents/safety-injury-prevention/emergency-preparedness/what-to-keep-after-flood/what-to-keep-after-a-flood-hi.pdf?rev=3b93bd5971304bde91eb708ba96bca46&hash=CB381FA41D4DCB10779C8C7C573B56E0&fbclid=IwVERFWAOyWI5leHRuA2FlbQIxMQBzcnRjBmFwcF9pZAo2NjI4NTY4Mzc5AAEeRox0xm-RfE1MR7FK84-U8lLGQ0Quz_a1_9n8i-MnkOw3RuC2wQr8mnUAC30_aem_W0BH3v_tSN8Z7BmWgzeePw


राहुल उपाध्याय । 19 दिसम्बर 2025 । सिएटल 



Thursday, December 18, 2025

सरोगेसी

समय कितना बदल रहा है।

लोग जन्मतिथि से अपनी राशि तय करते हैं। समय और स्थान देखकर जन्मपत्री बनती हैं। रिश्ते तय होते हैं।

कुछ इससे अपना भविष्य भी तय करते हैं। कितनी आयु रहेगी। कौनसी व्याधियों से जूझेंगे। नेता बनेंगे या अभिनेता। घर बनेगा या ग़रीब ही मर जाएँगे।

सीज़ेरियन ऑपरेशन से दिन-समय कुछ हद तक वश में कर लिया गया है। स्थान भी अब लोग बदलने लगे हैं। अमेरिका में पैदा हो तो जन्मपत्री चाहे कुछ भी कहे, अमेरिका की नागरिकता से जीवन के आसार बेहतर तो हो जाते हैं।

अमेरिका का वीसा लेने में कठिनाई हो सकती है तो उसका भी एक तोड़ निकाल लिया गया है।

अमेरिका के एक समाचार पत्र वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार चीन में प्रतिबंध होने के कारण कुछ बेहद अमीर लोग अमेरिका की ढीली व्यवस्था का फ़ायदा उठाकर सरोगेसी के ज़रिये अमेरिका में बच्चे पैदा करवा रहे हैं, और इसने अमेरिका में एक महँगा लेकिन फलता-फूलता कारोबार खड़ा कर दिया है।

इस व्यवस्था में माता-पिता अपना जेनेटिक मटीरियल (अंडाणु/शुक्राणु) विदेश भेजते हैं और बच्चा अमेरिका में जन्म लेता है।

प्रति बच्चे की लागत लगभग 2 लाख डॉलर (करीब 1.6–1.7 करोड़ रुपये) तक हो सकती है।

क्योंकि बच्चा अमेरिका में पैदा होता है, उसे अमेरिकी नागरिकता मिल जाती है — यही इस अंतरराष्ट्रीय माँग की एक बड़ी वजह है।

Tuesday, December 9, 2025

किताब

कब, कैसे, कहाँ से ख़ुशी मिल सकती है, कहा नहीं जा सकता। 


पिछले साल अजय ब्रह्मत्मज जी के अनुरोध पर सौ कविताओं का संकलन तैयार कर लिया। प्रमिला जी ने प्रस्तावना लिख दी। इ-बुक प्रकाशित हो गई। पे-वॉल के पीछे। जंगल में मोर नाचा, किसने देखा?


मनीष पांडेय ने अमेज़ॉन पर इ-बुक पब्लिश कर दी। जब फ़्री थी, कुछ लोगों ने डाउनलोड कर ली। कभी पढ़ेंगे यह सोचकर। 


कुछ ने पीडीएफ माँग ली। शायद कभी पढ़ेंगे नहीं। 


सिएटल में संतोष जी मिलीं। कहने लगीं मुझे तो किताब हाथ में चाहिए। किंडल, व्हाट्सएप, ब्लॉग, फ़ेसबुक मुझसे नहीं होता। 


मैंने उनके लिए एक अपने कम्प्यूटर से प्रिंट कर ली। जब तक देता तब तक वे भ्रमण पर निकल गईं। 


सत्यप्रकाश जी प्रयागराज जा रहे थे। मैंने वह किताब उन्हें मधु के लिए दे दी। उन्होंने कहा यह तो मैं रखूँगा। सो दूसरी प्रिंट कर के दी मधु के लिए। 


मन में तो था कि शायद मधु भी नहीं पढ़ेगी। कुछ कविताएँ तो व्हाट्सएप पर, ब्लॉग पर, फ़ेसबुक पर पढ़ ही चुकी है। फिर भी भेज दी। 


सपने में भी नहीं सोचा था कि मधु की बेटी, ओमी, इस किताब को इतना प्यार देगी। अपनी बना लेगी। मधु का नाम बदलकर अपना नाम लिख लेगी। 


मैं जानता हूँ कि उसे कविताओं की समझ नहीं है। वह इन्हें साहित्य की दृष्टि से नहीं आंक रही है। 


वह जो कुछ भी कर रही है अद्भुत है। कोई उससे करवा नहीं रहा है। उसे पता भी नहीं है कि उसके इस व्यवहार से मुझे कैसा लगेगा। 


आठ साल की बच्ची इसे अपने साथ स्कूल ले जा रही है। सीने से लगा रही है। माँ के भी हाथ नहीं आने दे रही है। छुपा कर रख रही है। 


क्या ज्ञानपीठ, क्या नोबेल। सब तुच्छ इसके सामने। 


राहुल उपाध्याय । 9 दिसम्बर 2025 । सिएटल